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पुनर्वसु · 27 में से नक्षत्र 7

पुनर्वसु नक्षत्र

पुनर्वसु सातवां नक्षत्र है, जो मिथुन और कर्क राशि को जोड़ता है। इसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं और अधिष्ठाता देवमाता अदिति हैं। इसका प्रतीक तरकश है। पुनर्वसु का अर्थ है "प्रकाश की वापसी", नवीनीकरण, आशावाद, सुरक्षित वापसी और समृद्धि। जातक उदार, ज्ञानी, क्षमाशील और विपरीत परिस्थितियों से उबरने वाले होते हैं।

स्वामी ग्रह
गुरु
प्रतीक
तीरों से भरा तरकश
अधिष्ठाता देवता
अदिति (देवताओं की माता)
राशि विस्तार
20°00′ मिथुन – 3°20′ कर्क
गण
देव गण

पुनर्वसु नक्षत्र के स्वभाव एवं विशेषताएं

  • आशावादी, धैर्यवान और सहृदय
  • वात्सल्यपूर्ण और दूसरों की सहायता करने वाले
  • विवेकशील और दार्शनिक सोच
  • विफलताओं के बाद पुनः उठ खड़े होने की क्षमता

सकारात्मक शक्तियां

सदा पुनः नई शुरुआत करने का सामर्थ्य, दूसरों को संबल देना और एक शांत व उदार आशावादिता बनाए रखना।

सुधार एवं विकास के क्षेत्र

बार-बार नई शुरुआत करने से कभी-कभी स्थिरता में कमी आ सकती है; एकाग्रता इस लचीलेपन को स्थायी सफलता में बदलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?

गुरु पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी (विंशोत्तरी दशा स्वामी) हैं, जिसका राशि विस्तार 20°00′ मिथुन – 3°20′ कर्क है।

पुनर्वसु नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?

पुनर्वसु नक्षत्र का प्रतीक तीरों से भरा तरकश है, और इसके अधिष्ठाता देवता अदिति (देवताओं की माता) हैं।

मुझे कैसे पता चलेगा कि पुनर्वसु मेरा जन्म नक्षत्र है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है। अपना सटीक जन्म नक्षत्र जानने के लिए हमारे निःशुल्क वैदिक स्नैपशॉट में अपना जन्म विवरण दर्ज करें।

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