पुष्य · 27 में से नक्षत्र 8
पुष्य नक्षत्र
पुष्य आठवां नक्षत्र है, जो कर्क राशि के मध्य में स्थित है। इसके स्वामी शनि हैं और अधिष्ठाता देवगुरु बृहस्पति हैं। इसका प्रतीक गाय का थन या खिला हुआ कमल है। पुष्य को सबसे शुभ और पोषक नक्षत्र माना जाता है। यह स्थिरता, सेवा, धर्म और आत्मिक विकास देता है। जातक कर्तव्यनिष्ठ, दयालु, अनुशासित और आध्यात्मिक होते हैं।
- स्वामी ग्रह
- शनि
- प्रतीक
- गाय का थन या कमल का फूल
- अधिष्ठाता देवता
- बृहस्पति (देवगुरु)
- राशि विस्तार
- 3°20′–16°40′ कर्क
- गण
- देव गण
पुष्य नक्षत्र के स्वभाव एवं विशेषताएं
- पोषण करने वाले और अत्यंत परोपकारी
- विश्वसनीय, गंभीर और अनुशासित
- धार्मिक, नैतिक और सिद्धांतवादी
- परिवार व समाज के सच्चे रक्षक
सकारात्मक शक्तियां
निस्वार्थ पोषण, स्थिरता और सच्ची निष्ठा, यह राशि चक्र की सर्वाधिक कल्याणकारी और संबल देने वाली ऊर्जाओं में से एक है।
सुधार एवं विकास के क्षेत्र
अत्यधिक देखभाल कभी-कभी मोह या कठोर अपेक्षाओं में बदल सकती है; दूसरों को अपनी गति से चलने की स्वतंत्रता देना हितकर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
शनि पुष्य नक्षत्र के स्वामी (विंशोत्तरी दशा स्वामी) हैं, जिसका राशि विस्तार 3°20′–16°40′ कर्क है।
पुष्य नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?
पुष्य नक्षत्र का प्रतीक गाय का थन या कमल का फूल है, और इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति (देवगुरु) हैं।
मुझे कैसे पता चलेगा कि पुष्य मेरा जन्म नक्षत्र है?
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है। अपना सटीक जन्म नक्षत्र जानने के लिए हमारे निःशुल्क वैदिक स्नैपशॉट में अपना जन्म विवरण दर्ज करें।