आश्लेषा · 27 में से नक्षत्र 9
आश्लेषा नक्षत्र
आश्लेषा नौवां नक्षत्र है, जो कर्क राशि के अंतिम भाग में स्थित है। इसके स्वामी बुध हैं और अधिष्ठाता नाग देवता हैं। इसका प्रतीक कुंडली मारे सर्प है। आश्लेषा सम्मोहक, अंतर्दृष्टिपूर्ण, कूटनीतिक और कुण्डलिनी शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। जातक तीव्र मनोवैज्ञानिक समझ, सम्मोहन, वाकपटुता और असाधारण बुद्धिमत्ता से युक्त होते हैं।
- स्वामी ग्रह
- बुध
- प्रतीक
- कुंडली मारे हुए सर्प
- अधिष्ठाता देवता
- नाग देवता (सर्प)
- राशि विस्तार
- 16°40′–30°00′ कर्क
- गण
- राक्षस गण
आश्लेषा नक्षत्र के स्वभाव एवं विशेषताएं
- अत्यंत सूक्ष्मदर्शी और सहजज्ञानी
- सम्मोहक और प्रभावशाली वक्ता
- रणनीतिकार और चतुर
- गहन बौद्धिक और रहस्यों को समझने वाले
सकारात्मक शक्तियां
मानव मनोविज्ञान और छिपे मंतव्यों को तुरंत भांपने की क्षमता, कुशल रणनीतिक समझ और गूढ़ विद्याओं तक सहज पहुंच।
सुधार एवं विकास के क्षेत्र
अत्यधिक गोपनीयता या अविश्वास संबंधों में तनाव ला सकता है; स्पष्टवादिता और विश्वास इस शक्ति को सात्विक बनाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
बुध आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी (विंशोत्तरी दशा स्वामी) हैं, जिसका राशि विस्तार 16°40′–30°00′ कर्क है।
आश्लेषा नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?
आश्लेषा नक्षत्र का प्रतीक कुंडली मारे हुए सर्प है, और इसके अधिष्ठाता देवता नाग देवता (सर्प) हैं।
मुझे कैसे पता चलेगा कि आश्लेषा मेरा जन्म नक्षत्र है?
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है। अपना सटीक जन्म नक्षत्र जानने के लिए हमारे निःशुल्क वैदिक स्नैपशॉट में अपना जन्म विवरण दर्ज करें।