पंचांग अंग · 3/5 · उज्जैन
आज का करण, 11 चर एवं स्थिर करण
करण तिथि का आधा भाग (6 अंश) होता है। एक तिथि में 2 करण होते हैं। कुल 11 करण होते हैं, 7 चर (पुनरावृत्त होने वाले) और 4 स्थिर (मास में केवल एक बार आने वाले)।
Saturday · 10 Oct 2026 · उज्जैन · सूर्योदय 6:21 AM · सूर्यास्त 6:06 PM
- करण
- Chatushpada
- Type
- fixed
- तक
- 9:24 AM
- तत्पश्चात
- Naga
All eleven karanas
- Bavamovable
- Balavamovable
- Kaulavamovable
- Taitilamovable
- Garamovable
- Vanijamovable
- VishtiBhadra · avoid
- Shakunifixed
- Chatushpadafixed
- Nagafixed
- Kimstughnafixed
चर और स्थिर करण
7 चर करण: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, और विष्टि (भद्रा)। 4 स्थिर करण: शकुनि, चतुष्पद, नाग, और किंस्तुघ्न (जो कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के उत्तरार्ध से शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के पूर्वार्ध तक आते हैं)।
भद्रा (विष्टि करण) क्या है?
विष्टि करण को ही भद्रा कहा जाता है। भद्रा काल में मांगलिक कार्य, विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि वर्जित माने जाते हैं, जबकि रक्षाबंधन व होलिका दहन में भद्रा का विशेष विचार किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
करण क्या है?
करण तिथि का आधा भाग होता है। एक चंद्र मास (30 तिथियों) में कुल 60 करण होते हैं।
विष्टि करण को भद्रा क्यों कहते हैं?
विष्टि करण की अधिष्ठात्री देवी भद्रा हैं, जो शनिदेव की बहन मानी जाती हैं। इनका स्वभाव उग्र होने के कारण इस समय शुभ कार्य टाले जाते हैं।
पंचांग के अन्य अंग
शहर अनुसार दैनिक पंचांग
प्रमुख भारतीय शहरों के लिए आज की तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त समय।