सावधानी का समय · उज्जैन
आज की भद्रा, क्या अभी भद्रा चल रही है?
भद्रा — विष्टि करण, वह काल जब शुभ कार्यों का आरंभ वर्जित होता है.
भद्रा पंचांग के 11 करणों में से 7वां करण (विष्टि करण) है। इसे सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की बहन माना गया है। भद्रा काल में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन और नए कार्यों का आरंभ त्याज्य माना जाता है।
वर्तमान में प्रभावी नहीं
नहीं: भद्रा अभी नहीं चल रहा है।
अगली उपस्थिति
Thu 22 Oct 2026
सटीक आरंभ और समाप्ति समय के लिए उस दिन का पंचांग खोलें।
उज्जैन के लिए समयबद्ध, पारंपरिक भारतीय संदर्भ। चंद्र कारक पूरे भारत में समान रहते हैं; केवल सूर्योदय-आधारित क्षण आपके स्थान के साथ बदलते हैं।
भद्रा का वास और प्रभाव
चंद्रमा की राशि के अनुसार भद्रा का वास स्वर्ग, पाताल या मृत्युलोक में माना जाता है। जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में हो, तो भद्रा मृत्युलोक (पृथ्वी) में मानी जाती है, जिसे सर्वाधिक प्रभावी और त्याज्य माना जाता है।
भद्रा पुच्छ और भद्रा मुख
भद्रा के कुल काल में भद्रा मुख अत्यंत त्याज्य होता है, जबकि अत्यंत अपरिहार्य स्थिति में भद्रा पुच्छ के समय कुछ कार्य किए जा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भद्रा में क्या नहीं करना चाहिए?
विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नया अनुबंध, व्यापार आरंभ और रक्षाबंधन जैसे मांगलिक कार्य भद्रा में नहीं किए जाते।
भद्रा का वास कैसे देखा जाता है?
चंद्रमा के राशि गोचर से भद्रा का वास निर्धारित होता है। मृत्युलोक की भद्रा में विशेष सावधानी रखी जाती है।
संबंधित मुहूर्त व समय
शहर अनुसार दैनिक पंचांग
प्रमुख भारतीय शहरों के लिए आज की तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त समय।