मृगशिरा · 27 में से नक्षत्र 5
मृगशिरा नक्षत्र
मृगशिरा पांचवां नक्षत्र है, जो वृषभ और मिथुन राशि को जोड़ता है। इसके स्वामी मंगल हैं और अधिष्ठाता सोम हैं। इसका प्रतीक हिरण का सिर है। मृगशिरा अन्वेषक और जिज्ञासु नक्षत्र है, कोमल, सतर्क और सदैव कुछ नया खोजने में तत्पर। जातक अत्यंत जिज्ञासु, संवेदनशील, त्वरित बुद्धि वाले और मिलनसार होते हैं।
- स्वामी ग्रह
- मंगल
- प्रतीक
- हिरण का सिर
- अधिष्ठाता देवता
- सोम (चंद्र देव)
- राशि विस्तार
- 23°20′ वृषभ – 6°40′ मिथुन
- गण
- देव गण
मृगशिरा नक्षत्र के स्वभाव एवं विशेषताएं
- सदा जिज्ञासु और खोजबीन में रत
- सौम्य, संवेदनशील और सुरुचिपूर्ण
- नए विचारों का सतत अन्वेषक
- तीव्र बुद्धि और हाजिरजवाबी
सकारात्मक शक्तियां
ज्ञान, सौंदर्य और सत्य की खोज करने की स्वाभाविक ललक; सीखने और लोगों से सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने में कुशल।
सुधार एवं विकास के क्षेत्र
सतत खोज कभी-कभी मानसिक चंचलता या असंतोष में बदल सकती है; एक लक्ष्य पर टिकना और ठहरना इसका मुख्य पाठ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी कौन सा ग्रह है?
मंगल मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी (विंशोत्तरी दशा स्वामी) हैं, जिसका राशि विस्तार 23°20′ वृषभ – 6°40′ मिथुन है।
मृगशिरा नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?
मृगशिरा नक्षत्र का प्रतीक हिरण का सिर है, और इसके अधिष्ठाता देवता सोम (चंद्र देव) हैं।
मुझे कैसे पता चलेगा कि मृगशिरा मेरा जन्म नक्षत्र है?
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है। अपना सटीक जन्म नक्षत्र जानने के लिए हमारे निःशुल्क वैदिक स्नैपशॉट में अपना जन्म विवरण दर्ज करें।