शुक्ल व कृष्ण एकादशी (11वीं तिथि)
एकादशी
एकादशी प्रत्येक चंद्र पखवाड़े का ग्यारहवां दिन होता है (महीने में दो बार) और भगवान विष्णु के भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियमित व्रत है। एक वर्ष में लगभग चौबीस एकादशियां होती हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना नाम और महात्म्य होता है।
2026 में एकादशी की तारीखें
सूर्योदय-व्यापिनी तिथि (स्मार्त परंपरा) के अनुसार उज्जैन के लिए गणना; क्षेत्रीय आधार पर एक दिन का अंतर संभव है।
प्रत्येक एकादशी पर चंद्रमा — शुक्ल व कृष्ण एकादशी (11वीं तिथि)।
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महत्व
एकादशी को ऐसा दिन माना जाता है जब मन सरलता से ईश्वर की ओर उन्मुख होता है; इस दिन अन्न और दालों का त्याग शरीर और मन को शुद्ध करता है और भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है। कई एकादशियां (जैसे निर्जला, देवशयनी, प्रबोधिनी) अपने आप में प्रमुख पर्व हैं।
एकादशी की व्रत व पूजन विधि
भक्त चावल, अनाज और दालों से परहेज करते हैं (कुछ लोग फलाहार या निर्जला उपवास रखते हैं), श्री हरि विष्णु की पूजा करते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और अगली सुबह (द्वादशी) को निर्धारित समय (पारण) के भीतर व्रत खोलते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी कितनी बार आती है?
प्रत्येक चंद्र मास में दो बार (एक बार शुक्ल पक्ष में और एक बार कृष्ण पक्ष में) वर्ष में लगभग 24 बार।
एकादशी पर क्या नहीं खाया जाता है?
चावल, गेहूं और अन्य अनाज तथा दालों का सेवन वर्जित होता है; कई श्रद्धालु फलाहार अथवा निर्जला उपवास रखते हैं।
पारण क्या है?
अगली सुबह (द्वादशी) सूर्योदय के बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त के भीतर व्रत खोलने की प्रक्रिया को पारण कहते हैं।
वर्ष की प्रमुख एकादशियां
वर्ष की प्रत्येक एकादशी का अपना नाम, कथा और भगवान विष्णु का स्वरूप होता है। 2026 और 2027 के लिए इनकी तारीखें संदर्भ-जांची गई हैं।
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