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पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र)

पूर्णिमा व्रत

सत्यनारायण व्रत के नाम से भी जाना जाता है

पूर्णिमा व्रत प्रत्येक माह की पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है, जो भगवान विष्णु और चंद्र देव को समर्पित प्रकाशमय दिन है। यह श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा के लिए सर्वमान्य दिन है।

2026 में पूर्णिमा व्रत की तारीखें

सूर्योदय-व्यापिनी तिथि (स्मार्त परंपरा) के अनुसार उज्जैन के लिए गणना; क्षेत्रीय आधार पर एक दिन का अंतर संभव है।

पूर्णिमा

प्रत्येक पूर्णिमा व्रत पर चंद्रमा — पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र)।

  • Purnimaशनि 3 जन
    चंद्रPausha (पूर्णिमांत)
  • Purnimaरवि 1 फ़र
    चंद्रMagha (पूर्णिमांत)
  • Purnimaमंगल 3 मार्च
    चंद्रPhalguna (पूर्णिमांत)
  • Purnimaगुरु 2 अप्रै
    चंद्रChaitra (पूर्णिमांत)
  • Purnimaशुक्र 1 मई
    चंद्रVaishakha (पूर्णिमांत)
  • Purnimaरवि 31 मई
    चंद्रJyeshtha (पूर्णिमांत)
  • Purnimaसोम 29 जून
    चंद्रJyeshtha (पूर्णिमांत)
  • Purnimaबुध 29 जुला
    चंद्रAshadha (पूर्णिमांत)
  • Purnimaशुक्र 28 अग
    चंद्रShravana (पूर्णिमांत)
  • Purnimaशनि 26 सितं
    चंद्रBhadrapada (पूर्णिमांत)
  • Purnimaसोम 26 अक्टू
    चंद्रAshwina (पूर्णिमांत)
  • Purnimaमंगल 24 नव
    चंद्रKartika (पूर्णिमांत)

महत्व

अपने पूर्ण प्रकाश में चंद्रमा की उपस्थिति पूजा, दान और सत्यनारायण व्रत के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है, जिसे कृतज्ञता और संकल्प पूर्ति के लिए रखा जाता है। कई पूर्णिमाएं (जैसे गुरु, बुद्ध, शरद, कार्तिक) अपने आप में प्रमुख त्योहार हैं।

पूर्णिमा व्रत की व्रत व पूजन विधि

श्रद्धालु दिन भर व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु की सत्यनारायण कथा के साथ पूजा करते हैं, पवित्र नदियों में स्नान व दान करते हैं और चंद्रोदय के समय दर्शन कर व्रत खोलते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्यनारायण व्रत क्या है?

सत्य के स्वरूप भगवान विष्णु की पारिवारिक पूजा, जो सामान्यतः पूर्णिमा के दिन कृतज्ञता प्रकट करने या मनोकामना पूर्ति पर की जाती है।

क्या कुछ पूर्णिमाएं त्योहार भी हैं?

हाँ, गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण महापर्व हैं।

पूर्णिमा का व्रत कब खोला जाता है?

सामान्यतः शाम को चंद्रोदय के दर्शन और दिन की पूजा संपन्न होने के बाद।

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